सर्द से लम्हे…

जब रेत यादों से उड़ी,
ख्वाब सब ही बेवजह लगने लगे
और काँच के ये आईने
अब आँखों में चुभने लगे

तू भी यून बदलता रहा
जैसे वक़्त निकलता गया
तेरे पीछे-पीछे मैं भी
आँखें बंद करके चलता रहा

Winter's Sorrow — teapalm

उदासी भारी यादें सभी, उस जगह पे बिखरेंगी
जिस लम्हे में मिलेंगे हम, देख लेना
हर दर्द भी तो टूटेगा, हर तड़प भी पिघलेगी
जिस लम्हे में मिलेंगे हम, तुम देखना

हाथों से मेरे इस पल
क्यूँ ये लम्हे निकल चले हैं?
आखों में मेरी क्यूँ
सब यादें सिमट गयी हैं?

मेरी साँस बह तो रही थी ठीक से
जो तूने लम्हे चुरा लिए
तो गुज़र ना सकी तेरे नज़दीक से
दर्द गुज़रता रहा सीने से, दिल भी निकल सा गया सीने से
चुभती रही तेरी यादें, जैसे काँच के टुकड़े बारीक से

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